मुंबई, 26 जनवरी 2026 – अभिनेता आमिर खान ने आज ब्रिहन्मुंबई महापालिका (BMC) चुनाव में मतदान के दौरान मराठी और हिंदी भाषा को लेकर चल रहे विवाद में अपनी प्रतिक्रिया दी। यह घटना स्थानीय प्रशासन और भाषा पर चल रहे गतिरोध के बीच हुई, जो महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक माहौल में महत्त्वपूर्ण भूमिका रखती है।
घटना क्या है?
बीएमसी चुनाव, जो मुंबई की सबसे बड़ी नगर पालिका के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, में यह विवाद चर्चा का एक मुख्य विषय बना। हिंदी और मराठी भाषा समर्थकों के बीच मतभेद के कारण गत कुछ दिनों से तनाव बना हुआ था। आमिर खान ने मतदान केन्द्र पर पहुंचकर इस विवाद पर अपनी बात रखी, जिससे मीडिया और जनता का ध्यान इस विषय की ओर गया।
कौन-कौन जुड़े?
इस विवाद में निम्नलिखित शामिल हैं:
- नागरिक
- भाषा प्रेमी
- महाराष्ट्र सरकार
- राजनीतिक दल
- सामाजिक संगठन
- बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान
बीएमसी चुनाव में कई पार्टियों ने भाषा नीति को चुनावी मुद्दा बनाया है। राज्य सरकार ने मराठी भाषा को प्राथमिकता देने के पक्ष में नियम बनाए हैं, जबकि कुछ समूह हिंदी के प्रचार-प्रसार की मांग कर रहे हैं।
आधिकारिक बयान/दस्तावेज़
महाराष्ट्र सरकार ने बीएमसी चुनाव के लिए जारी निर्देशों में मराठी भाषा के स्तर को बढ़ाने का आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने मतदान के दौरान किसी भी प्रकार के भाषाई भेदभाव से बचने की अपील की है। आमिर खान ने कहा:
“भारत की विविधता हमारी ताकत है, और सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए।”
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- बीएमसी चुनाव में कुल मतदाता: लगभग 1.6 करोड़
- आज तक मतदान प्रतिशत: करीब 45%
- सरकारी कार्यालयों में मराठी भाषा अनुपात: 80% तक बढ़ा दिया गया है
तत्काल प्रभाव
भाषा विवाद के कारण शहर के कुछ इलाकों में तनाव बढ़ा है, जिसके कारण प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है। चुनाव के दौरान आमिर खान जैसे दिग्गज हस्ती का इस मामले पर बोलना सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
प्रतिक्रियाएँ
- सरकार ने आमिर खान के बयान का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है।
- विपक्षी दलों ने इसे चुनाव प्रचार का हिस्सा करार दिया है।
- भाषा विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोनों भाषाओं के बीच समंजस्य बनाने की आवश्यकता जताई है।
आगे क्या?
बीएमसी चुनाव के बाद भाषा विवाद पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
राज्य सरकार आगामी सप्ताह में एक संवाद मंच की स्थापना करने की योजना बना रही है, जिसमें सभी पक्ष शामिल होंगे। इसके अलावा, चुनाव आयोग भी चुनाव पूर्व और पश्चात भाषाई सौहार्द बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
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