December 13, 2025

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अमेरिका ने भारत पर बढ़ाए 25% शुल्क, रूस से तेल ख़रीद को बताया कारण

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 अगस्त 2025 को भारतीय माल पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का आदेश दिया है। यह निर्णय भारत द्वारा जारी रूप से रूस से तेल आयात करने के कारण लिया गया है, जिसे व्हाइट हाउस ने मास्को के यूक्रेन युद्ध के समर्थन के लिए प्रमुख राजस्व स्रोत बताया है।

घटना क्या है?

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदी के संबंध में भारत पर चिंता जताई है और इस कारण भारतीय उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का कदम उठाया है। इसका मकसद रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस की आर्थिक सहायता को कम करना है।

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कौन-कौन जुड़े?

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी प्रशासनिक टीम
  • भारतीय सरकार, विशेषकर वाणिज्य एवं ऊर्जा मंत्रालय
  • संयुक्त राज्य अमेरिका का वाणिज्य विभाग
  • दोनों देशों के व्यापारी और उद्योग संगठन

आधिकारिक बयान/दस्तावेज़

व्हाइट हाउस ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस अतिरिक्त शुल्क का उद्देश्य मास्को को वित्तीय संसाधनों से वंचित करना और रूस के यूक्रेन में सैन्य आक्रमण को धीमा करना है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भी यह पुष्टि की है कि यह कदम रूसी तेल की खरीद को रोकने के लिए है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस फैसले पर चिंता जताई है और कहा है कि यह सीमा शुल्क अंतरराष्ट्रीय व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

पुष्टि-शुदा आँकड़े

भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपनी कुल तेल आवश्यकताओं का लगभग 15 प्रतिशत रूस से आयात किया है, जो पिछली तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। अमेरिकी सरकार ने इस तेल आयात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लागू किया है।

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तत्काल प्रभाव

  • भारतीय उद्योगों के लिए महंगे आयात की संभावना
  • तेल आधारित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा
  • अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं की निर्यात क्षमता में कमी
  • जनता को पेट्रोलियम उत्पादों, विशेषकर डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि सामना करनी पड़ सकती है

प्रतिक्रियाएँ

भारतीय सरकार ने इस निर्णय पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वे इसे कूटनीतिक स्तर पर हल करने को तत्पर हैं। विपक्षी दल इसे आर्थिक नीति पर एक चुनौती मानते हैं। उद्योग विशेषज्ञों ने भी कहा है कि यह भारतीय निर्यात को प्रभावित करेगा।

संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य वैश्विक संगठन यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह कर रहे हैं।

आगे क्या?

  1. भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) में इस निर्णय के खिलाफ शिकायत दर्ज करेगा।
  2. ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों की खोज को तेजी देगा।
  3. अमेरिका और भारत के बीच उच्च स्तरीय वार्ता की संभावना है, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी।

भारत और अमेरिका के बीच यह मामला द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और आगे की कूटनीतिक गतिविधियाँ इस पर स्पष्टता प्रदान करेंगी।

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