December 5, 2025

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्‍क लगाया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्‍क लगाने का एक कार्यकारी आदेश जारी किया है। यह आदेश भारत की रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण जारी किया गया है, जिसे अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध में मास्को की वित्तीय मदद के रूप में देखा है।

घटना क्या है?

अमेरिका ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू किया है। इस आदेश का आधार अमेरिकी व्हाइट हाउस का दावा है कि भारत की रूस से तेल खरीद रूस की आर्थिक सहायता कर रही है, जिससे यूक्रेन में युद्ध बढ़ावा पा रहा है। यह कदम व्यापार और वैश्विक राजनीति दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

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कौन-कौन जुड़े?

  • अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय
  • वाणिज्य विभाग (USA)
  • भारत सरकार
  • भारतीय व्यापार मंत्रालय
  • दोनों देशों के उद्योग संगठन

भारत सरकार ने इस विषय पर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू कर दी है।

आधिकारिक बयान/दस्तावेज़

वाइट हाउस की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारत की रूस से तेल आयात यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। भारत सरकार ने इसे व्यापारिक और रणनीतिक निर्णय माना है और अमेरिकी कदम की कड़ी आलोचना की है।

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पुष्टि-शुदा आंकड़े

  • भारत की रूस से तेल आयात में पिछले छह महीनों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • इस कारण अमेरिकी निर्यात को आर्थिक नुकसान हो सकता है, जिसकी राशि अभी आंकलनाधीन है।

तत्काल प्रभाव

२५ प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तीव्र बदलावआ सकता है। भारतीय निर्यातकों को आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है और अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं की मांग पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में तनाव की संभावना बढ़ जाएगी।

प्रतिक्रियाएँ

  • भारत सरकार ने निर्णय की निंदा की है और कहा है कि बिना वार्ता के यह कदम नहीं उठाया जाना चाहिए था।
  • विपक्षी दल और उद्योग विशेषज्ञ इस कार्रवाई को अनुचित मानते हैं।
  • अमेरिकी व्यापार मंडल और कुछ विशेषज्ञ इसे रूस के खिलाफ कड़ा कदम मानते हैं।
  • नागरिकों और व्यापारियों में इस विषय को लेकर दोराहा स्थिति देखी जा रही है।

आगे क्या?

भारत सरकार इस मुद्दे को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में ले जाने की संभावना तलाश रही है। साथ ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता की पुनः शुरुआत होने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में इस परिस्थिति में और विकास हो सकता है।

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