भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 6.5% करने का निर्णय लिया है, जो कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दर वृद्धि पिछले वर्ष में दूसरी बार की गई है और इसकी घोषणा 7 अप्रैल 2024 को मासिक नीति समीक्षा के दौरान की गई।
मुख्य विवरण
- रेपो दर वर्तमान में बढ़ाकर 6.5% कर दी गई है, जबकि पहले यह 6.25% थी।
- उद्देश्य: बढ़ती महंगाई और वित्तीय बाजार के दबाव को कम करना।
- मुद्रास्फीति को लक्षित सीमा के करीब (लगभग 4%) बनाए रखना प्रमुख लक्ष्य है।
प्रमुख पक्ष
- RBI की छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने निर्णय लिया।
- प्रभावित निकाय: प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, बैंकिंग विशेषज्ञ, आर्थिक सलाहकार, और वित्तीय संस्थान।
- अन्य प्रभावित: निवेशक, उद्यमी और आम जनता।
आधिकारिक आंकड़े
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में 6.1% वृद्धि।
- देश की GDP वृद्धि दर 5.9% है।
- वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट विकास 12% दर्ज किया गया।
- मुद्रास्फीति दर में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 1.2% की वृद्धि।
रेपो दर वृद्धि का आर्थिक प्रभाव
- ऋण महंगा होगा जिससे व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक उधारों पर असर।
- आवास और वाहन लोन की ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना।
- शेयर बाजार में सतर्कता और मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया मजबूत हुआ।
- उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में अस्थायी स्थिरता की उम्मीद।
प्रतिक्रियाएँ
- सरकार ने RBI के निर्णय का समर्थन किया है और विकास के संतुलन पर जोर दिया है।
- विपक्ष ने महंगाई और रोजगार की चिंता जताई है।
- अर्थशास्त्रियों ने कदम आवश्यक बताते हुए नीति में लचीलापन होने की जरूरत कही।
- उद्योग संघ ब्याज दरों के प्रभावों पर विचार कर रहे हैं।
आगे का रास्ता
- RBI आगामी नीतिगत समीक्षाओं में आर्थिक और मुद्रास्फीति संकेतकों के आधार पर संशोधन कर सकता है।
- सरकार महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन के लिए अतिरिक्त उपायों पर काम कर रही है।
- वित्त मंत्री आगामी त्रैमासिक बजट समीक्षा में आवश्यक कदम उठाएंगे।
इस निर्णय को आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और सभी संबंधित पक्ष इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ताज़ा अपडेट्स के लिए Questiqa Bharat के साथ जुड़े रहें।
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