भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 5 जून 2024 को अपनी रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.50 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम महंगाई को नियंत्रित करने और देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
घटना क्या है?
रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को ऋण प्रदान करता है। इस वृद्धि का उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। अप्रैल 2024 में सूक्ष्म मुद्रास्फीति दर 6.7% रही, जो RBI के लक्ष्य सीमा 4% ± 2% से अधिक है।
कौन-कौन जुड़े?
- भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) — RBI के गवर्नर, उप गवर्नर, और पांच अन्य सदस्य।
- वित्त मंत्रालय।
- आर्थिक विशेषज्ञ और उद्योग संगठन।
आधिकारिक बयान
RBI ने कहा है कि इस निर्णय का मकसद वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को संतुलित करना है। वर्तमान आर्थिक संकेतकों और वैश्विक आर्थिक परिवेश को देखते हुए यह कदम आवश्यक था।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
- शेयर बाजार में हल्की गिरावट देखी गई।
- बैंकों ने ऋण दरों में वृद्धि के संकेत दिए।
- होम लोन, वाहन लोन सहित अन्य क्रेडिट महंगे हो सकते हैं।
- सरकार ने इस कदम का स्वागत किया है।
- विपक्ष ने गरीब वर्ग के लिए राहत उपायों की मांग की है।
- अर्थशास्त्रियों ने कदम को प्रभावी माना है।
- उद्योग जगत ने सावधानी बरतने की सलाह दी है।
आगे की दिशा
RBI ने बताया है कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर नीति का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। अगली MPC बैठक 4 अगस्त 2024 को होगी जहाँ बदलावों पर पुनर्विचार हो सकता है।
यह नीति परिवर्तन मुद्रास्फीति नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो देश की आर्थिक स्थिरता में सहायक होगा।
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