भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25% की वृद्धि की घोषणा की है। यह बढ़ोतरी 5 जून 2024 को मुंबई में की गई और इसका उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना है।
घटना की प्रमुख बातें
- रेपो दर को 6.50% से बढ़ाकर 6.75% किया गया।
- रिवर्स रेपो दर को 6.00% से बढ़ाकर 6.25% किया गया।
- मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
इस फैसले में कौन-कौन शामिल हैं?
- RBI के गवर्नर।
- वित्त मंत्रालय।
- मौद्रिक नीति समिति के सदस्य।
- विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, बैंक, उद्योग संगठन और आम जनता।
पुष्टि-शुदा आँकड़े
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2024 में उपभोक्ता महंगाई दर (CPI) 6.2% थी, जो RBI के लक्ष्य 4% से अधिक है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए यह वृद्धि जरूरी थी।
तत्काल प्रभाव
- बैंकिंग क्षेत्र में फंड लेने की लागत बढ़ेगी।
- कर्ज़ की ब्याज दरें बढ़ेंगी, जिससे होम लोन, ऑटो लोन आदि महंगे होंगे।
- बचत पर ब्याज दरें बढ़ कर बचत को प्रोत्साहित करेंगी।
- शेयर बाजार में अस्थिरता देखने को मिली है।
- मुद্রास्फीति को नियंत्रित करने की उम्मीद है।
प्रतिक्रियाएँ
- वित्त मंत्रालय: कदम का स्वागत करते हुए अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए जरूरी बताया।
- विपक्षी दल: आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला कदम।
- वित्तीय विशेषज्ञ: इसे उचित और आवश्यक कदम माना जो आर्थिक स्थिरता लाएगा।
- उद्योग संगठन: सतर्क प्रतिक्रिया दी, वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका।
आगे की नीति
RBI ने संकेत दिए हैं कि आगे की नीतियाँ मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास की गति पर निर्भर करेंगी। अगली समीक्षा 31 जुलाई 2024 को होगी, जिसमें पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार और RBI बाजार की निगरानी जारी रखेंगे।
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