December 8, 2025

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रिजर्व बैंक ने जीडीपी वृद्धि दर में संशोधन किया, आर्थिक सुधारों पर केंद्रित है नीति

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 15 जून 2024 को मुंबई में अपनी वार्षिक नीति समीक्षा के दौरान राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर में संशोधन किया है। इस संशोधन के अनुसार, अनुमानित GDP वृद्धि दर को 7.1 प्रतिशत से घटाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया गया है। यह कदम वैश्विक आर्थिक दबावों और घरेलू सुधारों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

घटना क्या है?

RBI ने अपनी मासिक आर्थिक संकेतांक रिपोर्ट में GDP वृद्धि दर को दिसंबर 2023 की तुलना में घटाया है। इसका कारण निम्नलिखित है:

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  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
  • उज्जवल एक्सपोर्ट की धीमी गति
  • घरेलू मांग में अस्थिरता

साथ ही, RBI ने मौद्रिक नीति में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

कौन-कौन जुड़े?

इस प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाने वाले हैं:

  1. RBI के गवर्नर
  2. वित्त मंत्रालय
  3. मौद्रिक नीति समिति (MPC)
  4. केंद्रीय मंत्रिमंडल
  5. उद्योग समूह और आर्थिक विशेषज्ञ

मौद्रिक नीति समिति ने GDP संशोधन को मंजूरी दी है और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आर्थिक सुधारों के लिए अतिरिक्त योजनाएं अनुमोदित की हैं।

आधिकारिक बयान/दस्तावेज़

RBI ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नीति समीक्षा रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें मुद्रास्फीति, बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय स्थिरता के संकेतक भी शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर आर्थिक वृद्धि को स्थायी बनाए रखने पर जोर दिया है।

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पुष्टि-शुदा आँकड़े

  • वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में GDP वृद्धि दर: 6.5% (पिछले वर्ष की समान तिमाही से 0.3% कम)
  • मुद्रास्फीति दर: 5.7%, जो RBI के लक्ष्य के निकट है
  • निर्यात में गिरावट: 2%
  • घरेलू उपभोग में मामूली वृद्धि

तत्काल प्रभाव

GDP वृद्धि दर में संशोधन का प्रभाव निवेशकों और बाजारों पर मिश्रित रहा है। घरेलू शेयर बाजार में दबाव देखा गया जबकि विदेशी निवेशकों ने सुधारों को सकारात्मक माना है। आम नागरिकों के लिए यह संकेत है कि अर्थव्यवस्था अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, जिससे रोजगार और मूल्य स्तरों पर प्रभाव पड़ सकता है।

प्रतिक्रियाएँ

  • सरकार ने इसे केवल एक तकनीकी संशोधन बताया है और दीर्घकालीन विकास योजनाओं की पुष्टि की है।
  • विपक्षी दलों ने आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।
  • उद्योग महासंघों ने सुधारों की आवश्यकता को स्वीकार कर स्थिर नीतियों की मांग की है।
  • आर्थिक विशेषज्ञों ने मौद्रिक नीति को अधिक लचीला बनाए जाने की सलाह दी है।

आगे क्या?

RBI ने अगली नीति समीक्षा 1 अगस्त 2024 को करने का संकेत दिया है जिसमें नई आर्थिक नीतियों और संभावित ब्याज दरों में बदलाव पर चर्चा होगी। सरकार अपनी प्राथमिकता GDP वृद्धि में सुधार और निवेश तथा बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की रखेगी।

इस बीच, निवेशक, उद्योग और आम नागरिक आगामी घोषणाओं का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ताज़ा अपडेट्स के लिए Questiqa Bharat के साथ जुड़े रहें।

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