December 5, 2025

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रिज़र्व बैंक ने फिर बढ़ाई रेपो दर, जानिए क्या होगा आपके साथ

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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 5 अप्रैल 2024 को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। यह कदम महंगाई नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।

घटना क्या है?

RBI ने अपनी बैंकों को ऋण प्रदान करने की दर, यानी रेपो दर, 6.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.75 प्रतिशत कर दी है। यह बढ़ोतरी बाजारों में ब्याज दरों को प्रभावित करेगी एवं कर्ज लेना महंगा कर सकती है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) के इस फैसले का उद्देश्य वर्ष 2024-25 में मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना है।

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कौन-कौन जुड़े?

इस फैसले को RBI के गवर्नर के नेतृत्व में छह सदस्यीय MPC ने सर्वसम्मति से लिया है।

  • वित्त मंत्रालय
  • बैंकिंग क्षेत्र
  • वित्तीय संस्थान
  • व्यापारिक जगत के अधिकारी
  • राज्य और केंद्र सरकार के आर्थिक सलाहकार

ये सभी इस नीति के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।

आधिकारिक बयान/दस्तावेज़

RBI ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी प्रेस रिलीज में बताया कि मुद्रास्फीति दर में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। MPC की बैठक में आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता दोनों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। RBI की कीमत स्थिरता नीति के तहत अगले कुछ महीनों में ध्यान रखा जाएगा।

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पुष्टियां एवं आँकड़े

  • मार्च 2024 में मुद्रास्फीति दर 6.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो RBI के लक्ष्य 4 प्रतिशत से ऊपर है।
  • खुदरा बैंक ऋण वृद्धि दर में थोड़ी धीमी गति देखी गई है।
  • इस वृद्धि से बैंक उधारकर्ताओं के लिए ऋण की लागत बढ़ जाएगी।

तत्काल प्रभाव

रिपो दर बढ़ने से विशेष रूप से होम लोन, पर्सनल लोन और व्यवसायिक ऋण महंगे हो जाएंगे। इससे कर्ज लेने वाले और उपभोक्ता खर्च दोनों प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, इस कदम से मुद्रास्फीति को काबू में लाने की संभावना बढ़ेगी। वित्तीय बाजारों में प्रारंभिक प्रतिक्रिया मिली-जुले रही है; शेयर बाजार में हल्की गिरावट देखी गई जबकि मुद्रा सुदृढ़ हुई है।

प्रतिक्रियाएँ

  • सरकार ने RBI के निर्णय का स्वागत किया है और बताया कि यह आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
  • विपक्षी दलों ने कहा कि इस कदम से आम जनता के लिए कर्ज लेना मुश्किल होगा।
  • आर्थिक विशेषज्ञों ने इसे मुद्रास्फीति नियंत्रण की दिशा में सही कदम माना है।
  • उद्योग मंडल ने कर्ज महंगा होने पर चिंताएँ जताई हैं।
  • आम जनता में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं; कुछ लोग बचत बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं।

आगे क्या?

RBI ने कहा है कि वह आगामी सत्रों में आर्थिक संकेतकों का बारीकी से विश्लेषण करता रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर और कदम उठाएगा। मौद्रिक नीति समीक्षा अगले तीन महीनों में फिर से की जाएगी। निवेशक और आम लोग दोनों इस नयी नीति का असर महसूस करेंगे।

अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए RBI की यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। ताज़ा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहिए Questiqa Bharat।

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