संसद ने 25 अप्रैल 2024 को लंबे समय तक चली बहस के बाद डेटा सुरक्षा विधेयक 2024 को मंजूरी दी, जो भारत में डेटा और गोपनीयता के क्षेत्र में एक नया युग स्थापित करेगा। यह विधेयक ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से व्यक्तियों के डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
घटना क्या है?
सरकार ने एक नया डेटा सुरक्षा विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करना, डेटा संचालकों के दायित्व निर्धारित करना, और एक डेटा संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना करना है। यह विधेयक नागरिकों को उनके डेटा पर अधिकार प्रदान करता है और डेटा उल्लंघनों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
कौन-कौन जुड़े?
इस विधेयक पर चर्चा और पारित प्रक्रिया में कई पक्ष सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे:
- केंद्र सरकार
- संसदीय समिति
- विपक्षी दल
- तकनीकी विशेषज्ञ
- नागरिक समाज के प्रतिनिधि
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विधेयक का मसौदा तैयार किया, और संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में इसे विस्तार से विचार किया गया।
आधिकारिक बयान/दस्तावेज़
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने संसद में विधेयक की महत्ता पर जोर दिया कि यह डिजिटल युग में नागरिकों की निजता की सुरक्षा करेगा। सरकार ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से भारत में डेटा सुरक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा। संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसके सभी विवरण और प्रावधान शामिल हैं।
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- डेटा उल्लंघन पर जुर्माना: 4% वार्षिक ग्लोबल टर्नओवर या ₹15 करोड़ तक
- डिजिटल उपभोक्ता सुरक्षा की मांग: प्रति वर्ष 30% वृद्धि
- सांसदों की संख्या: 350 में से 280 ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया
तत्काल प्रभाव
विधेयक के पारित होने से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कड़े नियमों का पालन करना होगा, जिससे उपभोक्ता डेटा के दुरुपयोग में कमी आएगी। इससे नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और ऑनलाइन विश्वास बढ़ेगा। यह डिजिटल मार्केट तथा विदेशी निवेश के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
प्रतिक्रियाएँ
- सरकार ने विधेयक को डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि बताया।
- विपक्ष ने कुछ प्रावधानों में संशोधन की मांग की, पर विधेयक पारित हुआ।
- डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे डिजिटल अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना।
- उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि स्पष्ट नियम नीति में स्थिरता लाएंगे।
- आम जनता में निजता संरक्षण को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
आगे क्या?
अब विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा। इसके लागू होने के बाद सरकार डेटा संरक्षण प्राधिकरण के गठन शुरू करेगी और संबंधित नियमावली बनाएगी। सरकारी और निजी क्षेत्र में डेटा सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाएगा।
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