सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2024 को देश भर की नदियों के संरक्षण के लिए नए नियम लागू किए हैं, जो भारत के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
घटना क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने नदियों की सफाई और संरक्षण के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले के तहत प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाएगी और नदी तटों पर अवैध निर्माण पर पूर्ण रोक लगेगी।
कौन-कौन जुड़े?
- सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
- राज्य सरकारें
- जल संसाधन विभाग
- विभिन्न पर्यावरणीय संगठन और सामाजिक समूह
आधिकारिक बयान/दस्तावेज़
MoEFCC ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इस फैसले के पालन के लिए व्यापक योजना जारी की है, जिसमें अगले दो वर्षों में नदी प्रदूषण को 40% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी राज्य सरकारों को 6 महीनों के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- सरकार की पर्यावरण रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत की 70% नदियाँ गंभीर स्तर पर प्रदूषित हैं।
- नदी प्रदूषण कम करने के लिए 5000 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है।
- पिछले पाँच वर्षों में नदियों के किनारे 30,000 से अधिक अवैध निर्माण हुए हैं।
तत्काल प्रभाव
राज्य सरकारों ने नदी तटों पर निर्माण गतिविधियाँ तुरंत रोक दी हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की निगरानी बढ़ाई गई है। इस निर्णय की सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ निवेशकों और पर्यावरण विशेषज्ञों से मिली हैं, जबकि कुछ स्थानीय व्यापारिक समूहों ने चिंता जताई है।
प्रतिक्रियाएँ
- केंद्र सरकार के प्रतिनिधि ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
- विपक्षी दलों ने फैसला समर्थन किया।
- पर्यावरण विज्ञानी इसे दीर्घकालिक लाभकारी मानते हैं।
- कुछ उद्योग समूहों ने इसे ‘विनियामक मार’ बताया।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से अगले 6 महीनों में प्रगति रिपोर्ट मांगी है। MoEFCC राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान तेज करने की योजना बना रहा है और भविष्य में और सख्त कानून लागू हो सकते हैं।
सारांश
यह नया पर्यावरण फैसला नदियों की सफाई और संरक्षण के लिए निर्णायक साबित होगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कदम भारत में जल प्रदूषण कम करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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