सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें विभिन्न सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला 25 अप्रैल 2024 को दिल्ली में दिया गया, जिसका उद्देश्य देश के बढ़ते पर्यावरण संकट को नियंत्रित करना है।
घटना क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कई निर्देश दिए हैं। इनमें प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, वाहनों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर नए मानक स्थापित करना शामिल है। अदालत ने प्रदूषण बढ़ने से सांस संबंधी रोगों में वृद्धि को देखते हुए कड़े कदम उठाने को कहा है।
कौन-कौन जुड़े?
- केंद्र सरकार
- राज्य सरकारें
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- सुप्रीम कोर्ट की बेंच
- पर्यावरण संबंधी सामाजिक संगठन
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)
पक्षों में मुख्य रूप से पर्यावरण मंत्रालय और राज्य सरकारें प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू करने के लिए उत्तरदायी हैं। सामाजिक संगठन और नागरिक लोकतांत्रिक दबाव बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
घटना की समयरेखा
- 10 जनवरी 2024: दिल्ली और आस-पास प्रदूषण स्तर अत्यधिक बढ़ा।
- 15 फरवरी 2024: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए सुनवाई शुरू की।
- 5 अप्रैल 2024: केंद्र सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
- 25 अप्रैल 2024: सुप्रीम कोर्ट ने सख्त पर्यावरण संरक्षण आदेश पारित किए।
आधिकारिक बयान/दस्तावेज़
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सभी संबंधित एजेंसियों को 6 माह के भीतर प्रदूषण मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि यह आदेश गंभीरता से लिया जा रहा है और सभी राज्य सरकारों को इसका पालन करने के लिए कहा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भी कड़ी निगरानी का निर्देश मिला है।
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण में 35% वृद्धि।
- सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों में 20% वृद्धि।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित।
तत्काल प्रभाव
इस फैसले से प्रदूषण नियंत्रण措施ों में तेजी आएगी। उद्योगों और वाहनों पर निगरानी कड़ी होगी। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है और प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा। दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी सुधार दिखने लगा है।
प्रतिक्रियाएँ
- सरकार ने फैसला स्वागतयोग्य बताया और इसे आवश्यक कदम कहा।
- पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे सही दिशा में बड़ा कदम माना।
- विपक्ष ने पर्यावरण संरक्षण के समर्थन के साथ कुछ आर्थिक प्रभाव की चिंता व्यक्त की।
- आम जनता में जागरूकता बढ़ी, विशेष रूप से स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों में।
- उद्योग संगठनों ने तकनीकी सुधारों में सहयोग का आश्वासन दिया।
आगे क्या?
सरकार ने अगले छह माह में सुरक्षा योजनाओं को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा है। निगरानी स्वतंत्र एजेंसियों से कराई जाएगी तथा आवश्यकतानुसार नियम और कड़े किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हर तीन माह में मॉनीटरिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।
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