भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण को सशक्त बनाने हेतु 10 जून 2024 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह आदेश पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के नए मानक स्थापित करने के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके द्वारा देश भर में पर्यावरण नीतियों के अनुपालन को सख्ती से लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
घटना क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने जल, वायु और मृदा प्रदूषण की रोकथाम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारों को स्वतंत्र पर्यावरण निगरानी प्राधिकरण स्थापित करने का निर्देश दिया गया है जो 15 जून 2024 से प्रभावी होगा। साथ ही, पर्यावरणीय नुकसान रोकने में विफलता पर कड़े दंड लगाने का प्रावधान भी शामिल है।
कौन-कौन जुड़े?
- सुप्रीम कोर्ट
- भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- विभिन्न राज्य सरकारें
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- सामाजिक संगठन एवं पर्यावरण विशेषज्ञ
ये सभी इस आदेश के मुख्य पक्ष हैं और न्यायालय ने विशेषज्ञों की सलाह से यह निर्णय लिया है।
आधिकारिक बयान और दस्तावेज़
पर्यावरण मंत्रालय की प्रेस रिलीज के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय पर्यावरण नीति को और सुदृढ़ करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, पर्यावरण की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन अपरिहार्य है।
नए दिशा-निर्देश उद्योगों के मानकों को भी कड़ा करेंगे।
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- पिछले पाँच वर्षों में औसत वायु प्रदूषण स्तर में 12% की वृद्धि हुई है।
- जल प्रदूषण के मामले भी गंभीर बने हुए हैं।
- पर्यावरण मंत्रालय ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
तत्काल प्रभाव
इस आदेश से उद्योगों तथा शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय कड़ाई से लागू होंगे। नतीजतन नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा तथा प्रदूषण-संबंधित बीमारियों में कमी आएगी। साथ ही, पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
प्रतिक्रियाएँ
- सरकार ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
- विपक्षी दलों का कहना है कि यह आदेश लोगों के स्वास्थ्य हेतु लाभकारी होगा।
- पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय करार दिया है।
- कुछ उद्योग संगठनों ने इसे चुनौतीपूर्ण बताते हुए समुचित मार्गदर्शन की उम्मीद जताई है।
आगे क्या?
सरकार और संबंधित विभाग अगले तीन महीनों में पर्यावरण निगरानी प्राधिकरण की स्थापना करेंगे। इसके अंतर्गत नियमित निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 सितंबर 2024 को निर्धारित की है जिसमें अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।
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