December 13, 2025

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गुवाहाटी जलभराव से बेहाल, IMD ने जताई और भारी वर्षा की चेतावनी

गुवाहाटी
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असम में लगातार हो रही भारी वर्षा और बाढ़ की चेतावनी के बीच गुवाहाटी शहर एक बार फिर जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 2-3 दिनों तक राज्य में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है, जिससे बाढ़ और जलजमाव की स्थिति और विकराल हो सकती है।

20 मई की रात ने गुवाहाटी को किया जलमग्न

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20 मई 2025 की रात गुवाहाटी में हुई मूसलधार बारिश ने शहर के कई इलाकों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। ज़ू रोड, नबीन नगर, हाटीगांव, गणेशगुड़ी, मालीगांव, उलूबाड़ी, लचित नगर और चांदमारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रिकॉर्ड स्तर की बारिश

IMD के अनुसार, गुवाहाटी के AWS स्टेशन पर 112.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि शहर के अन्य क्षेत्रों में भी 100 मिमी से अधिक वर्षा हुई। यह भारी वर्षा शहर के निम्न-स्थित इलाकों में जलभराव को और अधिक गंभीर बना रही है।

शिक्षा और परिवहन व्यवस्था प्रभावित

भारी बारिश के कारण गुवाहाटी के कई स्कूलों को बंद करना पड़ा। हाटीगांव, मालीगांव और गणेशगुड़ी जैसे क्षेत्रों में छात्रों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुछ विद्यालय परीक्षाओं के चलते खुले रहे, लेकिन उपस्थिति बहुत कम रही। वहीं, सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ और लोगों को दफ्तर पहुंचने में घंटों लग गए।

प्रशासन सतर्क, राहत कार्य जारी

असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने राज्य की बाढ़ तैयारी की समीक्षा की और सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) को राहत, पुनर्वास और लॉजिस्टिक समर्थन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें भी बाढ़-प्रवण जिलों में तैनात की गई हैं।

गुवाहाटी की भौगोलिक और शहरी समस्याएं

गुवाहाटी की भौगोलिक स्थिति — खासकर उसका कटोरे के आकार का भूगोल — जलनिकासी को जटिल बनाता है। साथ ही, अनियोजित शहरीकरण और जलनिकासी प्रणाली की कमी शहर की जलभराव समस्या को हर साल और गंभीर बनाती है।

बाढ़: हर साल की त्रासदी

असम में बाढ़ की समस्या कोई नई नहीं है:

2020: 5 मिलियन लोग प्रभावित, 149 मौतें

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2022 (सिलचर): 5.4 मिलियन लोग प्रभावित, 200 से अधिक मौतें

हर साल मानसून के साथ बाढ़ राज्य के लाखों लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर देती है।

जलवायु परिवर्तन की भूमिका

जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। 1901 से 2015 के बीच भारत के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में तीन गुना वृद्धि हुई है, जिससे बाढ़ की घटनाएं भी बढ़ी हैं। असम, खासतौर पर ब्रह्मपुत्र घाटी, इस बदलाव का गंभीर प्रभाव झेल रही है।

समाधान: तत्काल राहत नहीं, दीर्घकालिक नीति

गुवाहाटी की जलभराव समस्या का समाधान केवल तत्काल राहत उपायों से नहीं हो सकता। इसके लिए दीर्घकालिक और ठोस कदम आवश्यक हैं:

शहर की जलनिकासी प्रणाली का व्यापक पुनर्निर्माण

अनियोजित शहरीकरण पर सख्त नियंत्रण

प्रभावी आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणाली

नागरिक जागरूकता और स्थानीय सहभागिता

असम में बाढ़ और जलभराव अब एक वार्षिक आपदा बन चुके हैं। इसे केवल प्राकृतिक घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। जब तक राज्य सरकार, शहरी नियोजन एजेंसियां और नागरिक मिलकर दीर्घकालिक रणनीति नहीं अपनाते, तब तक हर साल गुवाहाटी और असम के अन्य हिस्सों को इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

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