कोलंबो, 5 अप्रैल – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे हैं। यह यात्रा 2019 के बाद पहली और 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद चौथी श्रीलंका यात्रा है। यह दौरा भारत-श्रीलंका रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, खासकर रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में।
श्रीलंका पहुंचते ही गर्मजोशी से स्वागत
पीएम मोदी शुक्रवार शाम थाईलैंड दौरा खत्म करके कोलंबो पहुंचे। उन्हें कोलंबो के बंडारनायके इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत मिला। श्रीलंका के पांच वरिष्ठ मंत्री, जिनमें विदेश मंत्री विजीथा हेराथ, स्वास्थ्य मंत्री नलींदा जयतिस्सा और मत्स्य मंत्री रामलिंगम चंद्रशेखर शामिल थे, ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते और भारतीय झंडे लहराते दिखे।
पीएम मोदी ने ‘X’ पर पोस्ट किया और भारतीय समुदाय से मिले
मोदी ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा:
“मैं कोलंबो पहुंच गया हूं। स्वागत करने आए सभी मंत्रियों और गणमान्य व्यक्तियों का आभार। श्रीलंका में होने वाले कार्यक्रमों का मुझे बेसब्री से इंतजार है।”
यह संदेश भारत और श्रीलंका दोनों जगह लोगों ने खूब सराहा।
बाद में पीएम मोदी ताज समुद्र होटल में भारतीय मूल के लोगों से मिले। लोगों ने उन्हें देखकर खुशी जताई और भारत-श्रीलंका के गहरे सांस्कृतिक रिश्तों को याद किया।
इंडिपेंडेंस स्क्वायर में भव्य स्वागत
शनिवार सुबह कोलंबो के प्रसिद्ध इंडिपेंडेंस स्क्वायर में पीएम मोदी को औपचारिक रूप से गार्ड ऑफ ऑनर और तोपों की सलामी दी गई। इस मौके पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री उनके साथ थे। वे राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके द्वारा मेज़बानी पाने वाले पहले विदेशी नेता बने हैं।
इस दौरे के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल और आर्थिक सहयोग से जुड़े करीब 10 अहम समझौते होने की उम्मीद है। इनमें से 7 समझौते रक्षा क्षेत्र से जुड़े हो सकते हैं। ये समझौते 35 साल पहले श्रीलंका से भारतीय शांति सेना (IPKF) की वापसी की कड़वी यादों को पीछे छोड़कर रक्षा संबंधों में नया अध्याय खोल सकते हैं। यह कदम क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
उच्च स्तरीय बैठकें और विकास परियोजनाएं
पीएम मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके राष्ट्रपति सचिवालय में मुलाकात करेंगे और साझेदारी के अब तक के कामों की समीक्षा करेंगे। रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा था:
“हमारे साझा भविष्य के लिए भागीदारी बढ़ाने के विजन की प्रगति की समीक्षा करने का यह मौका है।”
वे दोनों नेता भारत द्वारा वित्तपोषित कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शुरुआत भी करेंगे। इनमें संपूर सोलर पावर प्रोजेक्ट का वर्चुअल शिलान्यास भी शामिल है, जो श्रीलंका की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। इसके अलावा, भारत द्वारा श्रीलंका की कर्ज पुनर्गठन योजना और मुद्रा विनिमय (करेंसी स्वैप) के समर्थन से जुड़े दस्तावेज भी साझा किए जाएंगे।
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने कहा, “ऊर्जा क्षेत्र भारत-श्रीलंका साझेदारी का एक मजबूत स्तंभ है।” त्रिंकोमाली में तेल भंडारण सुविधाओं के लिए भारत, श्रीलंका और यूएई के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर भी बातचीत चल रही है, जिसे इस दौरे के दौरान अंतिम रूप दिया जा सकता है।
भारत का समर्थन और श्रीलंका की उम्मीदें
श्रीलंका 2022 से शुरू हुए गंभीर आर्थिक संकट से उबर रहा है। भारत ने संकट के समय 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर की मदद देकर श्रीलंका को सहारा दिया था। पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने भारत के समर्थन को सराहा और कहा, “हम चाहते हैं कि रिश्ते और मज़बूत हों और जिन कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर बात हुई थी, वे जल्द लागू हों।”
धार्मिक यात्रा और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक
6 अप्रैल रविवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके अनुराधापुरा शहर जाएंगे और वहां प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में प्रार्थना करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है।
तीन दिन की ऐतिहासिक यात्रा
यह यात्रा कूटनीति, विकास और सांस्कृतिक मेलजोल की एक मिसाल बनती जा रही है। खासकर रक्षा और ऊर्जा सहयोग में हुए बदलाव भविष्य में भारत-श्रीलंका रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
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