December 13, 2025

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RBI की जून बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं, नीति रही ‘Neutral’

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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जून 2024 की बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.5% पर स्थिर रखा। साथ ही, कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) भी 3% पर बरकरार है। इस बैठक में मौद्रिक नीति का रुख ‘Accommodative’ से बदलकर ‘Neutral’ कर दिया गया, जो नीति में सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण का संकेत है।

घटना क्या है?

4 से 6 जून 2024 के बीच हुई MPC की बैठक में मौद्रिक नीतियों की समीक्षा की गई। अप्रैल 2024 में की गई पिछली कटौती के बाद यह पहली बैठक थी जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। मई तक 1.5% कुल कटौती हो चुकी थी और CRR को 3% तक घटाया गया था ताकि बैंकों की तरलता बढ़ाई जा सके।

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कौन जुड़े?

  • RBI की पांच सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति जिसमें RBI गवर्नर, वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि और आर्थिक विशेषज्ञ शामिल हैं।
  • केंद्र सरकार और बैंकिंग क्षेत्र
  • वित्त मंत्रालय, व्यावसायिक बैंक, वित्तीय बाजार और आम जनता

आधिकारिक बयान

RBI ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि मौद्रिक नीति अब ‘Neutral’ मोड में है, जिसका अर्थ है कि:

  1. मौद्रिक प्रोत्साहन में वृद्धि सीमित रहेगी।
  2. मुद्रास्फीति नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  3. महंगाई दर में सुधार और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा।
  4. आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करते हुए कीमतों पर नियंत्रण रखा जाएगा।

पुष्टि-शुदा आँकड़े

  • रेपो रेट: 5.5%
  • CRR: 3%
  • पिछली कटौती: इस साल तीन बार कुल 1.5% की कमी
  • महंगाई दर: अप्रैल 2024 में 5.3%

तत्काल प्रभाव

रेपो रेट स्थिर रहने से:

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  • बैंकों के लागत पर प्रभाव सीमित रहेगा।
  • उधार दरों में स्थिरता बनी रहेगी।
  • घरेलू वित्तीय बाजारों में अस्थिरता से बचाव होगा।
  • मुद्रास्फीति नियंत्रण RBI की प्राथमिकता बनी रहेगी।
  • सामान्य जनता को ऋण लागत में कोई तत्काल बदलाव नहीं होगा।
  • व्यापार एवं उद्योग के लिए यह जोखिम कम करने वाला निर्णय है।

प्रतिक्रियाएँ

  • सरकार ने RBI के फैसले का स्वागत किया और इसे आर्थिक स्थिरता के लिए सकारात्मक बताया।
  • विपक्ष ने RBI को महंगाई को देखते हुए कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया।
  • आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Neutral’ नीति से बाजार को स्पष्ट संकेत मिलेगा और आर्थिक सुधार तेजी से होगा।
  • वित्तीय संस्थानों ने फैसला उचित और संतुलित बताया।

आगे क्या?

  • RBI अगले तीन महीनों के लिए मौद्रिक नीति पर नजर रखेगा।
  • आवश्यकतानुसार पुनः समीक्षा की जाएगी।
  • जुलाई के मॉनसून सत्र में संसद में आर्थिक स्थिति पर चर्चा होगी।
  • ब्याज दरों और मुद्रास्फीति की स्थिति पर विशेषज्ञ निगरानी जारी रखेंगे।

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