December 5, 2025

QuestiQa भारत

देश विदेश की खबरें आप तक

RBI ने रेपो रेट में कटौती के बाद मौद्रिक नीति की दिशा बदली

Share Questiqa भारत-
Advertisements
Ad 5

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) ने 4 से 6 जून 2024 के बीच अपनी पिछली बैठक में रेपो रेट में 50 आधार अंक की कटौती की, जिससे रेपो रेट 5.5 प्रतिशत हो गया। यह इस वर्ष की लगातार तीसरी कटौती थी। साथ ही, कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को 1 प्रतिशत घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया। इस बैठक में, नीति का रुख ‘Accommodative’ से ‘Neutral’ कर दिया गया, जिससे मुद्रास्फीति नियंत्रण और अर्थव्यवस्था की स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा।

घटना क्या है?

भारतीय रिज़र्व बैंक की MPC ने जून 2024 के MPC बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए:

Advertisements
Ad 7
  • रेपो रेट को घटाकर 5.5 प्रतिशत किया गया।
  • कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को घटाकर 3 प्रतिशत किया गया।
  • मौद्रिक नीति की दिशा ‘Accommodative’ से ‘Neutral’ की गई।

कौन-कौन जुड़े?

इस निर्णय में शामिल मुख्य पक्ष हैं:

  • RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC), जिसमें केंद्रीय बैंक के गवर्नर एवं अन्य सदस्य शामिल हैं।
  • वित्त मंत्रालय, जो परामर्श प्रक्रिया में भाग लेता है।
  • बैंक, वित्तीय संस्थान एवं समस्त भारतीय अर्थव्यवस्था, जिन पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

आधिकारिक बयान/दस्तावेज़

RBI ने आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया कि यह समीक्षा आर्थिक संकेतकों के आधार पर की गई है और वित्तीय स्थिरता एवं मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए नीति का रुख ‘Neutral’ किया गया है। भविष्य की नीतियाँ इसी आधार पर निर्धारित होंगी।

पुष्टि-शुदा आँकड़े

  1. रेपो रेट: 6 जून 2024 को घटाकर 5.5 प्रतिशत।
  2. कैश रिजर्व रेशियो (CRR): 1 प्रतिशत की कटौती के बाद 3 प्रतिशत।
  3. यह इस वर्ष की तीसरी रेपो रेट कटौती है।

तत्काल प्रभाव

इस निर्णय के बाद:

Advertisements
Ad 4
  • बैंकों द्वारा ऋण की ब्याज दरों में कमी की संभावना, जिससे कर्ज लेना सस्ता होगा।
  • उपभोक्ता खर्च और निवेश में वृद्धि की उम्मीद।
  • शेयर बाजारों में सकारात्मक प्रभाव।
  • मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच बेहतर संतुलन की आशा।

प्रतिक्रियाएँ

  • सरकार ने RBI के इस कदम का स्वागत किया और इसे आर्थिक विकास के लिए लाभकारी माना।
  • विपक्षी दलों ने नीति के संतुलित दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
  • वित्तीय विशेषज्ञों ने बढ़ती मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय को उपयुक्त बताया।
  • बैंकिंग क्षेत्र और उद्योग जगत ने इसे सकारात्मक संकेत माना।

आगे क्या?

RBI आगामी मौद्रिक नीति सत्रों में आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण करते हुए नीतियों में आवश्यक संशोधन करता रहेगा। बाजार और आर्थिक गतिविधियों के अनुसार यह दिशा निर्धारित करता रहेगा।

ताज़ा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहिए Questiqa Bharat

About The Author

You cannot copy content of this page

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com