भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 4 से 6 जून 2024 के बीच अपनी मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) की बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखते हुए 5.5% पर बरकरार रखा। इस निर्णय से पहले की बैठक में RBI ने इस साल लगातार तीसरी बार रेपो रेट में 50 बेसिस प्वॉइंट्स की कटौती की थी। वहीं, कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को भी घटाकर 3% कर दिया गया था। बैठक में समिति ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘Accommodative’ से ‘Neutral’ कर रखा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब RBI महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाने की स्थिति में आ गया है।
घटना क्या है?
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने जून 2024 की बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर अपरिवर्तित रखा। इससे पहले पिछले महीने की बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वॉइंट्स की कमी की गई थी, जो इसे 5.5% पर पहुंचा दिया था। कैश रिजर्व रेशियो (CRR), जो बैंकिंग संस्थानों को जमा के रूप में केंद्रीय बैंक के पास रखने की अनिवार्य राशि होती है, उसे भी कम किया गया था ताकि बैंकिंग सिस्टम में तरलता बढ़ाई जा सके। मौद्रिक नीति का रुख ‘Accommodative’ से ‘Neutral’ करने का निर्णय यह दर्शाता है कि RBI ने अब ब्याज दरों को बढ़ाने या घटाने के मामले में मध्य मार्ग अपनाया है।
कौन-कौन जुड़े?
इस निर्णय में निम्न पक्ष मुख्य भूमिका में थे:
- भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC), जिसमें केंद्रीय बैंक के गवर्नर और चार अन्य सदस्य शामिल होते हैं।
- केंद्रीय वित्त मंत्रालय, जो नीति के प्रभावों पर नजर रखता है।
- भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और वित्तीय बाजार, जो फैसले से सीधे प्रभावित होते हैं।
- उद्योग विशेषज्ञ और आर्थिक विश्लेषक, जो इस बदलाव की समीक्षा कर रहे हैं।
आधिकारिक बयान/दस्तावेज़
RBI की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में स्पष्ट किया गया है कि मौद्रिक नीति समिति ने मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास के बीच संतुलन को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट को स्थिर रखने का निर्णय लिया। नीति की भाषा में ‘Neutral’ रुख अपनाने का मतलब है कि आगामी दौर में मौद्रिक नीति में तेजी या रुकावट दोनों के लिए स्थान खुला है। इससे बाजार में ब्याज दरों को जारी रखने या आवश्यकतानुसार उनका संशोधन करने का संकेत मिलता है।
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- रेपो रेट: 5.5% (स्थिर)
- कैश रिजर्व रेशियो (CRR): 3% (1% कटौती)
- पिछली बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वॉइंट्स की कटौती
तत्काल प्रभाव
इस निर्णय से पूरे वित्तीय सेक्टर में स्थिरता का माहौल बना है। बैंक अपने कर्ज़ की ब्याज दरें अधिक स्पष्ट रूप से तय कर पाएंगे। यह नीति विशेष रूप से घरेलू उद्योगों तथा उपभोक्ता ऋण बाजार में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। निवेशकों को भी यह निर्णय भविष्य के आर्थिक माहौल के लिए संकेत प्रदान करता है। हालांकि, मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए RBI का ‘Neutral’ रवैया आसान नहीं होगा, लेकिन यह आर्थिक विकास को समर्थन देने की दिशा में भी कदम है।
प्रतिक्रियाएँ
इस निर्णय पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
- केंद्र सरकार ने RBI के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे सूझ-बूझ वाला कदम बताया है।
- वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- विपक्षी दलों ने भी इस पर संतुलित प्रतिक्रिया दी, कुछ ने इसे मध्यम स्वरों में लिए गए सफल निर्णय के रूप में देखा।
- बैंकिंग क्षेत्र और वित्तीय विशेषज्ञों ने कहा कि ‘Neutral’ रुख से बाजार में अनिश्चितता कम होगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
- विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति उन क्षेत्रों को राहत देगी जहां अभी आर्थिक वृद्धि की गुंजाइश मौजूद है।
आगे क्या?
RBI ने स्पष्ट किया है कि आगामी त्रैमासिक बैठक में आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति की रिपोर्ट के आधार पर पुनः नीति निर्धारण किया जाएगा। अगले महीने के आर्थिक डेटा के हिसाब से MPC फिर से बैठकर मौद्रिक नीति पर विचार करेगी। बाजार और आम जनता को सलाह दी गई है कि वे RBI के निर्णयों पर सतर्क नजर रखें।
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