भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में significant वृद्धि की है। 5.5% से बढ़ाकर अब यह 6% कर दिया गया है। यह बदलाव वित्तीय वर्ष 2023-24 के मध्य चरण में अर्थव्यवस्था के स्थायीत्व और मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, मौद्रिक नीति का रुख ‘Neutral’ से पुनः ‘Accommodative’ किया गया है।
घटना विवरण
4 से 6 जून 2023 के बीच MPC बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर लाया गया था, जो उस समय तीसरी लगातार कटौती थी। कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को 4% से घटाकर 3% किया गया था। लेकिन नवीनतम बैठक में मांग और मुद्रास्फीति की स्थिति के आधार पर रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की गई है।
प्रमुख पक्षकार
- मौद्रिक नीति समिति (MPC) – जिसमें RBI के गवर्नर, वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि और अन्य सदस्य शामिल हैं।
- RBI गवर्नर, जिन्होंने आर्थिक आंकड़ों का मूल्यांकन किया।
- वित्त मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय संगठन जिनके संकेतों को ध्यान में रखा गया।
आधिकारिक बयान
RBI की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, “मौद्रिक नीति समिति ने मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और मुद्रास्फीति को देखते हुए रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जो अब 6% पर पहुंचेगा।”
पुष्टि-शुदा आँकड़े
- रेपो रेट: 6%
- पिछली बैठक: 5.5%
- कैश रिजर्व रेशियो (CRR): 3% (पहले 4%)
- मौद्रिक नीति का रुख: ‘Accommodative’ से ‘Neutral’ होकर पुनः समीक्षा जारी
तत्काल प्रभाव
इस वृद्धि का उद्देश्य बढ़ती मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाना और बाजार में मुद्रा प्रवाह को नियंत्रित करना है। इस कारण ब्याज दरें बढ़ेंगी, जिससे ऋण महंगा होगा। इसका प्रभाव उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। कारोबार एवं निवेश गतिविधियों पर भी इसका जल्द असर दिखाई देगा। आम नागरिकों के लिए उधार लेना महंगा हो सकता है।
प्रतिक्रियाएँ
- सरकार: निर्णय का स्वागत, इसे आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया।
- विपक्ष: आपत्ति जताई, विकास दर पर नकारात्मक असर की चिंता।
- वित्तीय विशेषज्ञ: मुद्रास्फीति नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक कदम माने।
- उद्योग समुदाय: नीतिगत स्थिरता की मांग दोहराई।
- जनता: मिश्रित प्रतिक्रियाएँ मिलीं।
आगे की योजना
RBI ने संभावित भविष्य के संशोधनों की सूचना दी है और अगली MPC बैठक अक्टूबर 2023 में होगी, जिसमें आर्थिक उन्नति और मुद्रास्फीति के आंकड़ों का पुनर्मूल्यांकन होगा। इस दौरान सरकार और बैंकिंग क्षेत्र विभिन्न वित्तीय रणनीतियाँ अपनाएंगे।
यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साबित होगा। ताज़ा जानकारी के लिए Questiqa Bharat के अपडेट पढ़ते रहें।
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